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उत्तराखंड की पहली महिला जागर गायिका बसंती बिष्ट के बाद अब बसंती मेहरा भी चर्चे में हैं –

✍️ प्रकाश मेहरा

उत्तराखंड:–  उत्तराखंड में अनेक मौकों पर देवी देवताओं का स्तुतियां जागर के जरिए की जाती है इस परंपरा को अब जागर और मंगलगीत गायिका बसंती मेहरा आगे ले जा रहीं हैं। बल्कि उन्होंने “अपने पहाड़ अपनी संस्कृति” का महत्व भी बताया ।।

 

बसंती मेहरा जिला चमोली के सैनिक गांव Sawar की रहने वाली हैं और महिला मंगल दल की अध्यक्ष भी हैं गांव में कोई भी मंगल कार्य हो तो बसंती मेहरा गायन के लिए जाती हैं कोई भी सांस्कृतिक प्रतियोगिता हो तो पीछे नहीं रहती और गृहस्थी की बात करें तो पीछे नहीं रहती हर कार्य को लगन से करती हैं इन्हें एक अच्छा Pletform नहीं मिला और इनका कहना है कि हम उत्तराखंड की लोकविधा को जीवित रखने में अहम योगदान देंगे बल्कि अन्य महिलाओं को प्रेरित करने का काम करेंगे और करते हैं ।। 

 

*बसंती मेहरा की जीवन यात्रा*

 

इन्हें बचपन से ही कुछ अलग करने की लालसा थी अपने गृहस्थी जीवन से लेकर अपने हाथों से रिंगाल की टोकरी बनाना, कपड़े की शिलाई करना ,मंगलगीत गायन,जागर गायन,लोक गायन,अनेक कार्यक्रमों में नाटक प्रस्तुति करना पहले उसको लिखना फिर गायन करना।। गृहस्थी में बहुत काम होने के बाद भी बसंती किसी भी काम में पीछे नहीं रहती अपने काम को लगन से करती हैं।

 

अब बसंती बिष्ट के बाद बसंती मेहरा को अगर मौका मिलता है तो उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण का वह नायब हीरा बनेंगी। जिसने जागर और अन्य प्रस्तुतियां कर समाज की सोच को बदलेंगी।

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