

रामनगर रामलीला के २७ वें दिन का प्रसंग –

चलत विमान कोलाहल होई, जय रघुवीर कहै सब कोई।।
आज की कथा में राम जी अयोध्या चलने को बोलते है क्योंकि उनको भरत जी की बहुत चिंता थी।तब विभीषण जी पुष्पक विमान लाते है और सभी उसमे बैठ जाते है। भगवान सभी बंदरो को अपनी भक्ति प्रदान करते हुवे विदा लेते है और पुष्पक विमान में विभीषण हनुमान, सुग्रीव ,जामवंत नल नील ,लक्ष्मणजी, सीता जी के साथ अयोध्या को चल देते है ।रास्ते में सीता जी को सभी स्थलों से अवगत कराते ऋषि मुनियों से मिलते संगम दर्शन करते गंगा के तट पर आते है।

हनुमान जी को साधु का वेष धारण करके भरत जी से मिलने को भेजते है इधर निषादराज राम जी के आने की खबर सुनकर गंगा किनारे आते है और भगवन से मिलते है। सीता जी गंगा पूजन करती है और सभी का कुशल मंगल से अयोध्या आने का धन्यवाद देते हुए गंगा माता जी का आशीर्वाद लेती है। यही कथा का विश्राम हो जाता है और आज निषादराज जी पुष्पक विमान पर विराजमान भगवन की आरती करते हैं।
जय सिया राम –
हर हर महादेव –



