
वाराणसी:- महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग तथा रूस के *कोज्मा मीनिन निज़्नी नोवगोरोद स्टेट पेडागॉजिकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रूसी भाषा एवं संस्कृति आधारित शैक्षणिक कार्यक्रम का तीसरा दिन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और उत्साहपूर्ण रहा। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को रूसी भाषा, व्याकरण, उच्चारण, संस्कृति, इतिहास तथा रूस के महान साहित्यकारों और उनकी प्रसिद्ध रचनाओं से विस्तारपूर्वक परिचित कराया गया।
कार्यक्रम में रूस से आईं प्रोफेसर नतालिया ने रूस के प्रसिद्ध शहर निज़्नी नोवगोरोद और क्रेमल के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और वास्तुकला पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने वहां के प्रसिद्ध मंदिरों, बैंकों और संग्रहालयों की स्थापत्य कला एवं सांस्कृतिक विशेषताओं से विद्यार्थियों को अवगत कराया। साथ ही उन्होंने अपने विश्वविद्यालय के नाम और उसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में भी रोचक जानकारी साझा की।

प्रोफेसर नतालिया ने रूस के अनेक प्रसिद्ध साहित्यकारों और उनकी कालजयी रचनाओं का परिचय कराया। विशेष रूप से उन्होंने महान रूसी लेखक *मैक्सिम गोर्की* के जीवन और साहित्यिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की तथा उनके उस घर के चित्र भी विद्यार्थियों को दिखाए, जो आज संग्रहालय के रूप में संरक्षित है। विद्यार्थियों को विश्व प्रसिद्ध उपन्यास ‘माँ’ के रचयिता मैक्सिम गोर्की की अन्य चर्चित कृतियों, जैसे ‘बचपन’ और ‘यौवन’, के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।

इसके अतिरिक्त प्रोफेसर नतालिया ने रूस के विभिन्न विश्वविद्यालयों, संग्रहालयों तथा वहां की ऐतिहासिक और शाही जीवनशैली पर भी रोचक व्याख्यान दिया। उन्होंने रूस के प्रसिद्ध पायलट प्योत्र नेस्तेरोव की प्रेरणादायक कहानी भी विद्यार्थियों के साथ साझा की। उन्होंने बताया कि प्योत्र नेस्तेरोव ने 9 सितंबर 1913 को कीव के आकाश में अपने विमान से विश्व का पहला सफल वर्टिकल लूप पूरा कर विमानन इतिहास में एक नया अध्याय लिखा था।
वहीं *डॉ. दार्या* ने विद्यार्थियों को रूसी भाषा के चार-पांच अक्षरों और शब्दों को लिखना सिखाया। उन्होंने विद्यार्थियों को रूसी भाषा में विभिन्न रंगों और फलों के नाम पढ़ने एवं बोलने का भी अभ्यास कराया। इसके साथ ही *साइबेरिया पर आधारित फिल्म के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को वहां की जीवनशैली, संस्कृति और प्राकृतिक परिवेश से परिचित कराया। डॉ. दार्या ने साइबेरिया में अत्यधिक ठंड के दौरान पहने जाने वाले विशेष गर्म कपड़ों तथा वहां की कठिन जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप अपनाई जाने वाली जीवनशैली के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।*
वीडियो और रोचक दृश्य प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों को रूस के विभिन्न प्रसिद्ध स्थलों का आभासी भ्रमण भी कराया गया। वहीं अभिवादन और दैनिक संवाद से संबंधित कार्टून फिल्म के माध्यम से रूसी भाषा सीखने की प्रक्रिया को और अधिक सरल, रोचक और मनोरंजक बनाया गया।
सीखने-सिखाने की इस पूरी प्रक्रिया में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और सक्रियता के साथ भाग लिया। रूसी भाषा और संस्कृति को निकट से जानने-समझने का अवसर पाकर विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम ने न केवल उनके ज्ञान के दायरे का विस्तार किया, बल्कि भारत और रूस के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान की।



