
अमित चंद्रा
लखनऊ :- राजधानी लखनऊ में पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के पूर्वी जोन में दो थाने एक थाना गोमती नगर और दूसरा थाना विभूति खंड के क्षेत्रों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है, जैसे इन क्षेत्रों की पुलिस पूरी तरीके से नशे के अड्डे के आगे सर झुकाते हुए अपना कर्तव्य निभा रही है। कर्तव्य कहें या खानापूर्ति कहें, बात एक ही है,लेकिन कर्मयोगी नहीं कह सकते…
ग्वारी चौराहा —
थाना गोमती नगर के विराम खंड चौकी क्षेत्र स्थित चौराहे के बगल और थाना विभूति खंड के विशेष खंड चौकी क्षेत्र स्थित विजयपुर में नशे के अड्डे पुलिस पर इस तरीके से हावी हैं कि कानून व्यवस्था की तो रोज धज्जियां उड़ ही रही हैं, उच्च अधिकारी भी शायद वहां से गुजरने में अपना मुंह मोड़ लेते होंगे –
विजयपुर में नशे के अड्डे —
क्षेत्र की पुलिस नशे के अड्डों पर खुलेआम शराब के सेवन के साथ, नशेबाजी, हुडदंगई, गाली गलौज आदि पर रोक लगाने में जब नाकाम रहे, तो सोचिए क्षेत्र में अपराधियों व बदमाशों पर क्या लगाम कस पाएंगे…?
विवेचना निस्तारण करने में पूरी तरीके से फेल कहलाने वाली विराम खंड चौकी की पुलिस जब अपने क्षेत्र में खुलेआम नशे का सेवन करने जैसे मामूली मुद्दे पर काबू नहीं कर सकती, तो बड़े मामलों में तो पसीना छूट जाता होगा बेचारों का, वहीं विशेष खंड पुलिस जब अपने क्षेत्र में नशे के अड्डे पर काबू नहीं कर सकती, तो कोई भी पीड़ित इनसे क्या उम्मीद करके चौकी पर आता होगा..?
बड़े ही हैरत की बात है कि थाना गोमती नगर के विराम खंड चौकी के प्रभारी क्राइम टीम प्रभारी भी हैं पर इनके नेतृत्व में विराम खंड की पुलिस अपने क्षेत्र में मामूली मुद्दों को संभाल नहीं पाती, तो न जाने कैसे क्षेत्र में क्राइम पर पाबंदी लगाते होंगे। चौकी प्रभारी की कार्यशैली उनकी टीम खुद ही मिट्टी पलीत कर देती होगी। *वैसे भी विराम खंड चौकी में तैनात राजन केसरी जैसे पुलिसकर्मी जब विवेचना का निस्तारण नहीं कर सकते, नशे के अड्डे और उसके बगल पार्क में पीने वालों पर लगाम कसने के बजाए, स्वयं ही कहते होंगे, पी लो, पर जब हम वापस लौटे तो यहां दिखाई मत देना…*, उप निरीक्षक राजन केसरी के मुंह से निकलने वाले इन शब्दों में मुंह छुपाता कर्तव्य और जिम्मेदारी जरूर दर्शाता होगा, पर पुलिसिया अंदाज़ में मेहरबानी के बोल ….?
बात करें थाना विभूति खंड के विशेष खंड चौकी प्रभारी की, तो एक महिला होने के नाते जब समाज और अपने क्षेत्र में परिवार वालों के बारे में नहीं सोच सकतीं तो क्या जिम्मेदारी और कर्तव्य की बात कर पाएंगे…?, नशे का अड्डा ठीक मोहल्ले के बगल में है और क्षेत्र में नशे के अड्डे पर गुंडई, नशेबाजी और यहां तक झगड़ा मारपीट भी कभी कदर होते होंगे, पर उससे होने वाले परिणाम से क्या फर्क पड़ता है महिला चौकी प्रभारी श्वेता सिंह को, मोहल्ले वाले स्वयं अपना रास्ता और नज़रे बदल लें, पर नशे के अड्डे का मोह विशेष खंड प्रभारी श्वेता सिंह खत्म नहीं करना चाहतीं।
दिलचस्प होगा यह जानना कि चौकी प्रभारी विशेष खंड की नज़र में क्षेत्र क्या फायदा और लाभ का स्थान है या क्षेत्रवासियों की जिम्मेदारी मायने रखती है…?
वही बात करें थाना गोमती नगर के विराम खंड चौकी के पुलिस की तो कार्यशैली में बदनामी हो चाहे जितना, पर कर्तव्य और जिम्मेदारी के पीछे लाभ और फायदा होना जरूरी है…
पता नहीं क्यों उच्च अधिकारियों की नजरें इन दोनों चौकियों पर पढ़ती नहीं या स्वयं ही सोचते होंगे इन दोनों चौकियों को मुंह लगाना यानि शर्म से पानी तो नहीं पीना पड़ जाएगा…..



