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लखनऊ विश्वविद्यालय और मोरारजी देसाई संस्थान ने मिलकर मनाया विहंगम योग महोत्सव” —

 

 

लखनऊ :–    लखनऊ विश्वविद्यालय के योग विभाग, फैकल्टी ऑफ योग एंड अल्टरनेटिव मेडिसिन तथा मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वाधान में 7 जून 2026 को प्रातः 5:30 बजे से लखनऊ विश्वविद्यालय के द्वितीय परिसर जानकीपुरम के प्लेग्राउंड पर विहंगम योग महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन गणमान्य अतिथियों द्वारा सरस्वती वंदना के साथ दीप प्रज्वलित करके किया किया गया योग महोत्सव के मुख्य अतिथि पदम प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर आर. ए.एस. कुशवाहा, प्रॉक्टर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय द्वारा की गई कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह माननीय सदस्य ,विधान परिषद, उत्तर प्रदेश, प्रोफेसर अमिता कनौजिया, डीन स्टूडेंट वेलफेयर लखनऊ विश्वविद्यालय डॉक्टर संजय कुमार सिंह, प्रभारी सहायक निदेशक क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अनुसंधान संस्थान, आयुष मंत्रालय भारत सरकार तथा डॉक्टर राजीव मिश्रा सहायक आचार्य सोशल एंड प्रीवेंटिव मेडिसिन विभाग किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय थे।

 

कार्यक्रम के आयोजक डॉ अमरजीत यादव ने बताया कि भारत सरकार के द्वारा तैयार किए गए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से संबंधित कामन योग प्रोटोकॉल का अभ्यास योग प्रशिक्षको के द्वारा कराया गया। प्रातः काल कामन योग प्रोटोकॉल का अभ्यास करने से शरीर की मांसपेशियों एवं जोड़ों की सक्रियता एवं लचीलापन बढ़ता है । प्रोटोकॉल में खड़े होकर किए जाने वाले आसन ताड़ासन, चक्रासन का अभ्यास कराया गया। इनके अभ्यास से तंत्रिका तंत्र एवं शारीरिक संतुलन बढ़ता है बैठकर किए जाने वाले आसनों में वक्रासन उत्तान मंडूकासन का अभ्यास कराया गया इनके अभ्यास से मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ती है। तथा शरीर में आनंद पैदा करने वाले हार्मोन्स की मात्रा बढ़ती है पेट के बल किए जाने वाले आसन भुजंगासन, शलभासन का अभ्यास कराया गया। इन आसनों से पेट की मांसपेशियों की सक्रियता बढ़ती है रीढ की हड्डी मजबूत होती है और पाचन के विकारों में लाभ मिलता है। पीठ के बल किए जाने वाले आसन सेतुबंधासन, पवनमुक्तासन का अभ्यास कराया गया इन आसनों से पेट तथा कमर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इन योगासनों के अभ्यास से किडनी और हृदय स्वस्थ रहता है।
महोत्सव के दौरान कपालभाति, शीतली प्राणायाम, अनुलोम विलोम तथा भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कराया गया। प्राणायाम के अभ्यास से फेफड़ों की कार्य क्षमता बढ़ती है तथा तेजी से रक्त की अशुद्धि दूर होती है ध्यान और शांति पाठ के अभ्यास से शरीर का हार्मोनल संतुलन ठीक रहता है। और मस्तिष्क से निकलने वाली लाभदायक तरंगे शरीर में प्रवाहित होने लगती हैं ।जिससे शरीर की ऊर्जा एवं चेतना का स्तर बढ़ता है और चक्र जागरण की स्थिति उत्पन्न होती है।
कार्यक्रम के दौरान योग के माध्यम से स्वास्थ्य नामक संदेश को गूंजायमान किया गया।

इस अवसर पर उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, मोटापा, अर्थराइटिस,स्ट्रेस इत्यादि स्वास्थ्य समस्याओं के निवारण के लिए विशेष सत्रों का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पदम् श्री प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि योग की विधाएं अब चिकित्सा में उपयोग की जा रही हैं जो योग की वैज्ञानिकता के लिए शुभ संकेत हैं मैं स्वयं दमा एवं एलर्जी के रोगियों को योगाभ्यास एवं प्राणायाम की सलाह देता हूं जिसका परिणाम मुझे आश्चर्य जनक प्राप्त हो रहा है एक वैज्ञानिक अध्ययन का जिक्र करते हुए इन्होंने बताया कि योगासन करने से शरीर में संक्रमण की संभावना कम रहती है आत्म बल एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। विशिष्ट अतिथि इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह माननीय सदस्य विधान परिषद उत्तर प्रदेश ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री के अथक प्रयास एवं दूरदर्शी सोच के कारण आज संपूर्ण विश्व में योग दिवस एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। योग, भारतीय ऋषियों की मानवता को अनुपम सौगात है। यह पाया जा रहा है कि योग के अभ्यास से जीवन में शांति, समृद्धि एवं स्वास्थ्य उत्पन्न हो रहा है।

दोपहर 12:00 से योग सभागार में स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद फैकल्टी के वरिष्ठ आचार्य प्रोफेसर हरि हृदय अवस्थी मुख्य वक्ता थे प्रोफेसर अवस्थी ने बताया कि समय के साथ-साथ मधुमेह,उच्च रक्तचाप,अर्थराइटिस जैसे अनेक रोग उत्पन्न हो जाते हैं जिनकी रोकथाम आसन, प्राणायाम के अभ्यास से किया जा सकता है। साथ ही आपने यह भी बताया कि उचित आहार विहार से भी बढ़ती उम्र के कारण होने वाले रोगों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि प्रोटीन और फाइबर तथा मोटे अनाज का प्रयोग बढ़ती उम्र के लिए अधिक लाभदायक है। आगे प्रोफेसर अवस्थी ने कहा कि अल्जाइमर जैसे घातक रोग की रोकथाम के लिए वज्रासन, पश्चिमोत्तानासन साथ ही भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए।पार्किंसन से ग्रस्त रोगियों के लिए वीरभद्रासन अभ्यास काफी लाभकारी होता है।अर्थराइटिस जो कि बुजुर्गों में होने वाली एक आम समस्या है। उसके उपचार के लिए तितली आसान,सेतुबंधासन तथा अनुलोम विलोम का अभ्यास करना चाहिए। संकाय के अधिष्ठाता प्रो. आलोक कुमार यादव ने बताया कि नियमित योग अभ्यास करने से शरीर में ऊर्जा का संचार बना रहता है। बढ़ती उम्र के साथ होने वाली शारीरिक और मानसिक परेशानियों का उचित ढंग से निपटारा किया जा सकता है तथा जीवन को व्यवस्थित तथा नियमित भी किया जा सकता है। अतः प्रत्येक व्यक्ति यदि उचित समय से योग का अभ्यास करता है तो आने वाली शारीरिक और मानसिक समस्याओं का निस्तारण भी किया जा सकता है।
इस अवसर पर योग सभागार में विभाग के शिक्षक छात्र तथा कर्मचारी गढ़ उपस्थित रहे।

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