
लखनऊ:- लखनऊ के गोमती नगर के सीएमए भवन के ऑडिटोरियम में द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएमएआई) के लखनऊ चैप्टर द्वारा Internal Audit in ERP Envirment अधिनियम 2025 पर सेमिनार का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीपक जलाकर मुख्य अतिथि राजेश कुमार श्रीवास्तव जनरल UPMRC मैनेजर द्वारा लखनऊ चैप्टर के अध्यक्ष सी०एम०ए० नरेन्द्र कुमार, उपध्यक्ष सी०एम०ए० रंजीत सिंह, सी०एम०ए० अभिषेक मिश्रा सचिव, सी०एम०ए० नैन्सीं गुप्ता कोषाध्यक्ष सी०एम०ए० अमित यादव अध्यक्ष पी.डी.सी. सी०एम०ए० जूही उपाध्याय, सी०एम०ए० कविता तिवारी लखनऊ चैप्टर, में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सी०एम०ए० नरेन्द्र कुमार चेयरमैन लखनऊ चैप्टर ने कहा – आज के एकाउटिंग के समय ERP का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान है। ERP से एकाउटिंग को सही तरह से सरलीकरण किया गया है। ERP से एकाउटिंग का सही क्रियान्वयन हो रहा है कि इसके लिये इन्टर्नल ऑडिट के माध्यम से कैसे किया जाये इसके लिये हमारे बीच रामस्वरूप यादव मुख्य स्पीच के रूप में उपस्थित हुये है। जो इन्टर्नल ऑडिट ERP Envirment के बारे में विस्तार से बतायेगें।
सी०एम०ए० सुधान्शू द्विवेदी ने मैनेजिंग कमेटी का धन्यवाद दिया। आज को विषय समय के हिसाब से बहुत ही महत्वपूर्ण है जब हमने I.A. की शरूआत करी और आज के समय बहुत बदलाव आया है।
I.A. में बहुत सारे Internal Control होते है जो कि इन्टर्नल फाइनेंस Control के माध्यम से किया जाता है।
जहाँ ऑडिट कमेटी का गठन होता है वहा पर I.A. की रिपोर्ट भी ऑडिट कमेटी को भेजी जाती है, ACT 2013 से सी०एम०ए० को I.A. के लिये अधिकृत किया गया। I.A. ऑडिट सुझावी एवं Suggestive ऑडिट होना चाहिए।
जहाँ तक इंटरनल ऑडिट का संबंध है मेरे विचार से पहले इंटरनल ऑडिट मुख्यतः स्टार्टअप गतिविधियों वाउचिंग दस्तावेज़ों की जाँच ट्रायल बैलेंसए प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट तथा बैलेंस शीट की समीक्षा तक सीमित था।
मुख्य अतिथि राजेश कुमार श्रीवास्तव, UPMRC जनरल मैनेजर ने कहा, किन्तु वर्तमान समय में इंटरनल ऑडिट का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। इसके कार्यक्षेत्र Scop of Work में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जिसके कारण इसका महत्व भी काफी बढ़ गया है। आज इंटरनल ऑडिट की भूमिका बाह्य ऑडिट External Audit के समान महत्वपूर्ण हो गई है। बाह्य ऑडिटर चाहे CMA, CAअथवा बोर्ड द्वारा नियुक्त कोई अन्य योग्य पेशेवर हो उसे इंटरनल ऑडिट के निष्कर्षों और रिपोर्टों पर विचार करना होता है।
इसके अतिरिक्त इंटरनल ऑडिट अब CARO से संबंधित अनुपालनों की समीक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जिस पर ऑडिटर को अपनी टिप्पणियाँ देनी होती हैं। ऊर्जा प्रबंधन Energy Management), सामाजिक प्रभाव (Social Impact), पुनर्वास (Resettlement), विभिन्न अनुपालनों (Compliances) तथा ESG (Environmental, Social and Governance) जैसे विषयों के बढ़ते महत्व के कारण इंटरनल ऑडिट की जिम्मेदारियाँ और अधिक व्यापक हो गई हैं।
अतः आज के युग में इंटरनल ऑडिट केवल वित्तीय अभिलेखों की जाँच तक सीमित नहीं हैए बल्कि यह संगठन के जोखिम प्रबंधन, अनुपालन, स्थिरता (Sustainability) और सुशासन (Governance) का एक महत्वपूर्ण अंग बन चुका है।



