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गविष्ठि (गौ-रक्षार्थ धर्मयुद्ध) — जालौन एवं झाँसी में उमड़ा जन-सैलाब – 

'गौ को माता न कहने वाले किसी भी संत, पार्टी या नेता से आज से कोई संबंध नहीं'—अब होगा गौ-माता के रक्षकों का वोट --

 

 

 

जालौन/झाँसी :– मूल मंत्र: “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ”

​”आप वोट देते हैं। आपके वोट से वे सत्ता में आते हैं। सत्ता में आकर गौ-माता के खिलाफ काम करते हैं। तो गौ-हत्या के पाप के भागी आप भी बनते हैं—जाने या अनजाने। हम इसीलिए आए हैं ताकि यह पाप आपके सिर अनजाने में न चढ़े।”—’परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनंतश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’

 

जालौन–झाँसी: ऐतिहासिक 81 दिवसीय ‘गविष्ठि (गौ-रक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ (3 मई – 24 जुलाई 2026) के क्रम में ‘परमाराध्य’ जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘१००८’ ने जिला जालौन एवं झाँसी में जनसभाओं को संबोधित किया। उपस्थित जनसमुदाय ने वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण करते हुए गौ-रक्षा का संकल्प लिया।
​आपका वोट — उनकी सत्ता — गौ-माता का दुःख: विडंबना की श्रृंखला
​महाराजश्री ने जनसभा में सीधा आह्वान किया: “वे आपका वोट लेते हैं। आपके वोट से सत्ता में आते हैं। उसी सत्ता से कत्लखानों के लाइसेंस देते हैं। गौ-मांस के निर्यात को बढ़ावा देते हैं। सबसे ज्यादा बीफ निर्यात वाले राज्य की बागडोर संभालते हैं। यह श्रृंखला आपसे — मतदाता से — शुरू होती है। मतदाता पहला ‘अनुमतिदाता’ है। यदि आपने अनुमति नहीं दी होती, तो यह कुछ नहीं होता।”
​उन्होंने कहा: “हम आपसे किसी पार्टी का विरोध करने नहीं आए। हम एक सीधा सवाल लेकर आए हैं: क्या आप गौ-हत्या की सहमति देते हैं? आप कह रहे हैं — नहीं। तो हर पार्टी और हर प्रत्याशी को साफ बता दें: जिसे मेरा वोट चाहिए वह पहले गौ-माता को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करके, गौ-हत्या बंद करके आए। बिना इसके हमारे दरवाजे स्वागत नहीं।”
​’गौ-माता के द्रोहियों से अब हमारा कोई संबंध नहीं’

​महाराज ने जनसभा से एक उद्घोष, सामूहिक घोषणा करवाई:- 

​”मैं घोषणा करता हूँ / करती हूँ कि गौ मेरी माता है। मेरी गौ-माता के जो भी अंग-भंग करेगा और मारने का प्रयास करेगा — चाहे वह कोई भी संत हो, चाहे वह कोई भी पार्टी हो, चाहे वह कोई भी नेता हो — आज से उससे मेरा कोई संबंध नहीं होगा।”
​उन्होंने कहा: “हम किसी के विरुद्ध नहीं हैं। हम गौ-माता के पक्ष में हैं। जो गौ-माता के पक्ष में है — वह हमारा है। जो गौ-माता के विरुद्ध है — वह हमारा कोई नहीं, चाहे वह कितने ही बड़े दावे करे।”
​’जो गौ-माता की नहीं सुनेगा, वह आपकी भी नहीं सुनेगा’
​महाराजश्री ने एक तीखा आलोचना किया: “जो सरकार हिंदू होने का दावा करती है, भगवा पहनकर आती है, बड़े-बड़े वादे करती है — अगर वह इतने समय में गौ-माता की रक्षा नहीं कर पाई, तो आपकी किसी दूसरी समस्या को वह क्या सुनेगी? गौ-माता कसौटी है। जो इस कसौटी में फेल है, वह सब में फेल है। एक ही परीक्षा पास करनी है — गौ-माता को राष्ट्रमाता घोषित करो, गौ-हत्या बंद करो। तब विश्वास वापस मिलेगा।”

​सामूहिक संकल्प — चक्रधर मुद्रा — ‘अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ’

​महाराज ने चक्रधारी मुद्रा — दाहिना हाथ उठाकर पहली उँगली ऊँची कर — वैदिक मंत्र का तीन बार सामूहिक उच्चारण कराया: “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ”।
​उन्होंने इसका अर्थ समझाया — ‘जैसे इंद्र ने वृत्रासुर को पछाड़कर गौ-वंश को मुक्त कराया, वैसे ही मेरे सामने गौ-माता को सताने वाला असुर आएगा तो मैं भी उसे पछाड़ दूँगा।’ उन्होंने सभी से आग्रह किया: “यह मुद्रा और मंत्र रोज करें — धीरे-धीरे आपके भीतर रक्षा की शक्ति जाग्रत होती जाएगी।”
​24 जुलाई को लखनऊ में ‘अक्षौहिणी सेना’ का महासंकल्प
​3 मई 2026 से गोरखपुर से प्रारंभ हुई ‘गविशिष्ठा यात्रा’ उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की परिक्रमा कर रही है। यदि 81 दिनों की यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना — 2,18,700 धर्म-सैनिकों के साथ अगले चरण की घोषणा की जाएगी।

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