
लखनऊ:– भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए यह गर्व का विषय है कि एक अंतर-संस्थागत शोध दल को यूनाइटेड किंगडम के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस (UK IPO) से एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है। डॉ. कल्पना सिंह (लखनऊ विश्वविद्यालय) और प्रो. जे. पी. सिंह (यूपीटीटीआई, कानपुर) के सहयोग सें विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों की टीम ने “Synthesis Laboratory Device for Measurement of Photoluminescence” शीर्षक वाले अपने अभिनव प्रयोगशाला उपकरण के लिए यूके डिज़ाइन रजिस्ट्रेशन प्राप्त किया है।

यह उपकरण इंटरनेशनल डिज़ाइन क्लासिफिकेशन – क्लास 24 (मेडिकल एवं लेबोरेटरी उपकरण) के अंतर्गत पंजीकृत है
क्या है इस नवाचार की विशेषता?
यह उपकरण एक कॉम्पैक्ट टेबलटॉप प्रणाली है, जिसमें संश्लेषण (सिंथेसिस) और फोटोल्यूमिनेसेंस मापन की प्रक्रिया को एकीकृत किया गया है
पारंपरिक प्रणालियों में भारी उपकरण, खुले सैंपल होल्डर और जटिल नियंत्रण व्यवस्था होती है, जिससे संचालन कठिन और समयसाध्य हो जाता है।
नव विकसित डिज़ाइन में निम्न प्रमुख विशेषताएँ हैं:
1.शीर्ष पर स्थित गोलाकार मल्टी-सैंपल चैंबर
2.प्रकाशीय पृथक्करण हेतु हिंग्ड (ढक्कनयुक्त) संरचना
3.अग्रभाग में डिजिटल डिस्प्ले और एर्गोनोमिक कीपैड
4.स्थिर एवं कंपन-रोधी संलग्न ढांचा
5.बिना सैंपल हटाए संश्लेषण एवं मापन की सुविधा
इसकी गोलाकार सैंपल व्यवस्था एक साथ कई नमूनों पर समान प्रकाशीय प्रभाव सुनिश्चित करती है, जिससे परिणाम अधिक सटीक और पुनरुत्पादक (reproducible) बनते हैं।
वैज्ञानिक महत्व —
फोटोल्यूमिनेसेंस तकनीक का उपयोग नैनोमटेरियल अनुसंधान, सेमीकंडक्टर अध्ययन, जैव-चिकित्सीय विश्लेषण, औषधि अनुसंधान और उन्नत पदार्थ विज्ञान में व्यापक रूप से किया जाता है। यह नवाचार प्रयोगशाला कार्यप्रणाली को सरल, सुरक्षित और अधिक कुशल बनाता है।
डॉ. कल्पना सिंह ने कहा कि, यह उपलब्धि अंतरविषयक सहयोग और भारतीय शोध संस्थानों की नवाचार क्षमता का प्रमाण है। वहीं प्रो. जे. पी. सिंह ने इसे अकादमिक और तकनीकी संस्थानों के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जो भारत को वैज्ञानिक उपकरण डिज़ाइन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करेगा।
इस डिज़ाइन के सह-आविष्कारकों में डॉ. सर्वेंद्र कुमार, डॉ. शालिनी मलिक, डॉ. असीम दुबे, डॉ. अरविंद शर्मा, ललित कुमार, डॉ. जितेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. सुप्रियो चक्रवर्ती, डॉ. धीरेंद्र कुमार शर्मा, डॉ. उपासना देवी एवं अरुण शर्मा शामिल हैं
यह अंतरराष्ट्रीय पंजीकरण न केवल शोध दल के लिए बल्कि भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो वैश्विक स्तर पर भारत की बौद्धिक संपदा और नवाचार क्षमता को सुदृढ़ करता है।



