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एआई के दौर में विदेशी भाषाओं का महत्व: काशी विद्यापीठ में विशेष व्याख्यान आयोजित –

✍️ आशीष मिश्र

वाराणसी : —  महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग द्वारा “Studying Foreign Languages in the Era of Artificial Intelligence” विषय पर एक प्रभावशाली विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों की उत्साही भागीदारी देखने को मिली।

व्याख्यान के मुख्य अतिथि द इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेस यूनिवर्सिटी के रूसी भाषा के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पुष्प रंजन रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज धनकड़ द्वारा मुख्य अतिथि के स्वागत से हुआ। अपने उद्घाटन वक्तव्य में डॉ. धनकड़ ने चिंता जताई कि आज के विद्यार्थी बिना समुचित समझ के एआई टूल्स का उपयोग कर रहे हैं, जो दीर्घकाल में उनके बौद्धिक विकास के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।

 

 

 

अपने व्याख्यान में डॉ. पुष्प रंजन ने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। इससे बचना संभव नहीं है, लेकिन यदि एआई और मानवीय बुद्धिमत्ता का संतुलित उपयोग किया जाए, तो कम समय और कम मेहनत में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने छात्रों को भाषा सीखने और व्याकरण सुधारने के विभिन्न आधुनिक टूल्स की जानकारी भी दी।

डॉ. रंजन ने छात्रों को सचेत करते हुए कहा कि एआई का उपयोग अपनी बुद्धिमत्ता को विकसित करने के लिए करें, न कि उस पर निर्भर होकर अपनी सोचने-समझने की क्षमता को कमजोर बनाएं। उन्होंने नियमित कक्षाओं में भाग लेने की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी एआई टूल जीवंत कक्षा का अनुभव प्रदान नहीं कर सकता।

उन्होंने अनेक उदाहरणों के माध्यम से यह भी स्पष्ट किया कि एआई अभी तक मानवीय संवेदनाओं को समझने और उन्हें प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करने में सक्षम नहीं है। इस प्रेरणादायक व्याख्यान ने छात्रों को तकनीक और शिक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।

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