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व्यवहार में पंच परिवर्तन को समाज में किस प्रकार लागू करना है इस हेतु हम समस्त भारतीय नागरिकों को मिलकर प्रयास करने होंगे : मनोजकांत –

 

 

 

लखनऊ:- आज लखनऊ विश्विद्यालय समाज कार्य विभाग के जे.के सभागार में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद लखनऊ महानगर एवं कृष्णा देवी गर्ल्स पी.जी कॉलेज,लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में पंच परिवर्तन:राष्ट्र पुनर्निर्माण की दिशा विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र सह प्रचार प्रमुख,मुख्य वक्ता अभाविप पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही,अभाविप लखनऊ महानगर उपाध्यक्ष प्रो०शारिका दुबे,महानगर सह मंत्री सक्षम वर्मा ने एक साथ युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद व ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।

पंच परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण पर युवाओं को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय सह प्रचार प्रमुख ने प्रमुख बिंदुओं को रखा ।

1.कुटुंब प्रबोधन

2. सामाजिक समरसता

3. पर्यावरण 

 

 

इस पंच परिवर्तन कार्यक्रम को सुचारू रूप से लागू कर समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। स्व के बोध से नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होंगे। नागरिक कर्तव्य बोध अर्थात कानून की पालना से राष्ट्र समृद्ध व उन्नत होगा। सामाजिक समरसता व सद्भाव से ऊंच-नीच जाति भेद समाप्त होंगे। पर्यावरण से सृष्टि का संरक्षण होगा तथा कुटुम्ब प्रबोधन से परिवार बचेंगे और बच्चों में संस्कार बढ़ेंगे। समाज में बढ़ते एकल परिवार के चलन को रोक कर भारत की प्राचीन परिवार परंपरा को बढ़ावा देने की आज महती आवश्यकता है।

भारत में हाल ही के समय में देश की संस्कृति की रक्षा करना, एक सबसे महत्वपूर्ण विषय के रूप में उभरा है। सम्भावना से युक्त व्यक्ति हार में भी जीत देखता है तथा सदा संघर्षरत रहता है। अतः पंच परिवर्तन उभरते भारत की चुनौतियों का समाधान करने में समर्थ है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबोले जी कहते हैं कि बौद्धिक आख्यान को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से बदलना और सामाजिक परिवर्तन के लिए सृजित शक्ति को संगठित करना संघ के मुख्य कार्यों में शामिल है। इस प्रकार पंच परिवर्तन आज समग्र समाज की आवश्यकता है। पंच परिवर्तन में समाज में समरसता (बंधुत्व के साथ समानता), पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली, पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए पारिवारिक जागृति, जीवन के सभी पहलुओं में भारतीय मूल्यों पर आधारित ‘स्व’ (स्वत्व) की भावना पैदा करने का आग्रह जैसे आयाम शामिल हैं। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच जल संरक्षण, प्लास्टिक का त्याग और वृक्षारोपण को अपने जीवन का हिस्सा बनाना अनिवार्य है। संघ का मानना है कि प्रकृति की रक्षा करना हमारा सांस्कृतिक और देशभक्तिपूर्ण कर्तव्य है।

नागरिक कर्तव्यों के पालन हेतु सामाजिक जागृति; ये सभी मुद्दे बड़े पैमाने पर समाज से संबंधित हैं। दूसरे, इन विषयों को व्यक्तियों, परिवारों और संघ की शाखाओं के आसपास के क्षेत्रों को संबोधित करने की आज सबसे अधिक आवश्यकता है। इसे व्यापक समाज तक ले जाने की आवश्यकता है। यह केवल चिंतन और अकादमिक बहस का विषय नहीं है, बल्कि कार्रवाई और व्यवहार का विषय है।

मुख्य वक्ता घनश्याम शाही ने उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि

राष्ट्र पुनर्निर्माण (Nation Rebuilding) की प्रक्रिया में युवा शक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) जैसे छात्र संगठन इस विचार को केंद्र में रखकर ‘छात्र शक्ति’ को ‘राष्ट्र शक्ति’ में बदलने का कार्य करते हैं।राष्ट्र पुनर्निर्माण केवल भौतिक बुनियादी ढांचे का विकास नहीं है, बल्कि यह देश के सांस्कृतिक, शैक्षणिक और नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना है। एबीवीपी का मानना है कि शिक्षा वह माध्यम है जिससे समाज की मानसिकता में परिवर्तन लाया जा सकता है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए काम कर रही है, ताकि शिक्षा को भारतीय मूल्यों से जोड़ा जा सके और इसे ‘रोजगारोन्मुख’ बनाया जा सके।

जातिवाद और भेदभाव को मिटाने के लिए परिषद ग्रामीण क्षेत्रों में ‘अनुभव’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को जमीनी हकीकत से जोड़ती है।

भारत की आत्मा उसकी युवा शक्ति में बसती है। स्वामी विवेकानन्द ने डेढ़ सौ वर्ष पूर्व जिस युवा भारत की कल्पना की थी, आज वही भारत विश्व का सबसे बड़ा युवा राष्ट्र बन चुका है। 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्मे स्वामी विवेकानन्द ने अल्पायु में ही भारत की सांस्कृतिक चेतना को विश्व मंच पर न केवल प्रतिष्ठित किया बल्कि भारत को लेकर बनाई गई भ्रांतियों को दूर कर पुनर्परिभाषित भी किया।11 सितंबर 1893 को शिकागो में विश्व धर्म संसद में दिया गया उनका ऐतिहासिक भाषण आज भी भारतीय आत्मगौरव का उद्घोष माना जाता है। “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए”—यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का मंत्र है। राष्ट्रीय युवा दिवस युवाओं को आत्ममंथन और संकल्प का अवसर देता है। युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानन्द की जयंती यानी राष्ट्रीय युवा दिवस केवल उनके व्यक्तित्व को स्मरण करना नहीं, बल्कि युवाओं में आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति और सेवा भावना को जाग्रत करना है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने स्वामी विवेकानन्द को अपना आदर्श मानते हुए इस दिवस को राष्ट्रनिर्माण के संकल्प से जोड़ा है।

कार्यक्रम की प्रस्तावना एबीवीपी लखनऊ महानगर उपाध्यक्ष प्रो.सारिका दुबे ने रखी एवं आभार ज्ञापन मंत्री सक्षम वर्मा ने किया तथा मंच संचालन अभाविप अवध प्रांत SFD संयोजक शाश्वत अवस्थी ने किया।

इस अवसर पर एबीवीपी के पूर्व कार्यकर्ता व शोधार्थी राजाराम द्वारा लिखित पुस्तक राष्ट्र निर्माण में योग कर विमोचन भी किया गया।

इस कार्यक्रम में अभाविप राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रो ०भुवनेश्वरी भारद्वाज,प्रांत मंत्री अर्पण कुशवाहा,अवध प्रांत संगठन मंत्री अंशुल विद्यार्थी,विभाग संगठन मंत्री पुष्पेंद्र बाजपेई,सरिता पाण्डेय, अदिति पाल ,पुष्पा गौतम,नवीन आजाद दुबे,अभिषेक सिंह,अभिषेक बाजपाई सहित तमाम छात्र एवं छात्राएं उपस्थित रही।

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