
वाराणसी:- भारतीय ज्योतिष में कुण्डली (जन्मपत्री) को व्यक्ति के जीवन का खाका माना जाता है। कुण्डली निर्माण व फलादेश की कक्षा जन्म-समय, स्थान और तिथि के आधार पर ग्रहों की स्थिति (लग्न, राशि, नक्षत्र) को 12 भावों में सटीक रूप से स्थापित करना सिखाती है।

यह शिक्षा इष्टकाल, लग्न स्पष्ट, दशा-अन्तरदशा और अष्टकवर्ग की गणना के माध्यम से जीवन के सुख-दुःख, करियर, विवाह व स्वास्थ्य का विश्लेषण करना सिखाती है। इसका उद्देश्य जातक के भविष्य का सटीक पूर्वानुमान लगाना है। उक्त बातें शास्त्रार्थ महाविद्यालय (दशाश्वमेध) में कुण्डली निर्माण व फलादेश प्रशिक्षण कार्यशाला में संयोजक व संस्था के प्राचार्य डा. पवन कुमार शुक्ला ने कही। इन्होंनें बताया कि इस कक्षा में छात्र व जिज्ञासु कुण्डली बनाने की मूलभूत वैज्ञानिक और पारंपरिक विधियों को सीखेंगे। प्रथम दिन उद्घाटन सत्र में कुल 45 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। जो भी व्यक्ति व छात्र सीखना चाहें वो प्रतिदिन 12 बजे से कक्षा में शामिल हो सकते हैं। ज्योतिष विभाग के सदस्य डा.उमाशंकर त्रिपाठी,डा.अमोद दत्त शास्त्री के निर्देशन में ज्योतिर्विद आचार्य संजय उपाध्याय प्रशिक्षण देंगें।



