लखनऊ:- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) द्वारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम एवं जनजातीय गौरव के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा की जन्म की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर झारखंड के खूंटी जिले स्थित उनकी जन्मस्थली उलिहातु में भगवान बिरसा की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं रथ पूजन के पश्चात “भगवान बिरसा संदेश यात्रा” का शुभारंभ किया गया।

इसके उपरांत यह संदेश यात्रा भारत के विभिन्न जिलों से होते हुए अवध प्रांत पहुंची, जहां अवध प्रांत के रायबरेली, बाराबंकी, लवकुशनगर सहित कई जिलों का भ्रमण करते हुए लखनऊ स्थित बाबासाहब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय पहुंची। विश्वविद्यालय में कार्यकर्ताओं ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। तदोपरांत यात्रा लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंची, जहां अभाविप अवध प्रांत के प्रांत मंत्री पुष्पेंद्र बाजपेई सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ यात्रा का स्वागत किया।
लखनऊ विश्वविद्यालय में स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर यात्रा को सीतापुर के लिए रवाना किया गया।
सीतापुर रोड स्थित सेंट जोसेफ कॉलेज में भगवान बिरसा संदेश यात्रा के स्वागत में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. राज शरण शाही, विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष;अभाविप अवध प्रांत संगठन मंत्री अंशुल विद्यार्थी, सेंट जोसेफ कॉलेज के चेयरमैन डॉ. अनिल अग्रवाल, जोगिंदर सिंह गौतम, तथा विरसा मुंडा संदेश यात्रा के प्रांत संयोजक और अभाविप के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री गोविंद नायक उपस्थित रहे।
‘भगवान बिरसा संदेश यात्रा’ उलिहातु से प्रारंभ होकर खूंटी, चक्रधरपुर, चाईबासा, सरायकेला, रांची, जमशेदपुर, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, मोदिनीनगर, गढ़वा, दुद्धीनगर, रॉबर्ट्सगंज, वाराणसी, जौनपुर, कुशभवनपुर, रायबरेली, लखनऊ, सीतापुर, बरेली, मुरादाबाद तथा सहारनपुर से होते हुए देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 71वें राष्ट्रीय अधिवेशन स्थल पर 27 नवंबर को पहुंचेगी। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर संगोष्ठी, नुक्कड़ नाटक, प्रदर्शनी एवं जनजागरण कार्यक्रमों का आयोजन कर भगवान बिरसा मुंडा के जनजातीय गौरव हेतु किए गए कार्यों का संदेश आम जन तक पहुंचाया जाएगा।
संगोष्ठी में अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. राज शरण शाही ने कहा कि बिरसा मुंडा, जिन्हें ‘धरती आबा’ के नाम से भी जाना जाता है, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं। उनका जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलिहातु गाँव में हुआ। वे मुंडा जनजाति से संबंधित थे और आदिवासी समुदाय के अधिकारों हेतु संघर्ष करने वाले प्रमुख नेता थे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष ने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन आदिवासी समाज की कठिनाइयों तथा उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है। गरीबी और चुनौतियों के बीच पले-बढ़े बिरसा मुंडा ने शिक्षा ग्रहण की और मिशनरियों द्वारा आदिवासी संस्कृति पर किए जा रहे प्रहार का विरोध किया। उन्होंने अपने समुदाय को संगठित कर उनकी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखने का प्रयास किया।
डॉ. अनिल अग्रवाल ने कहा कि बिरसा मुंडा ने आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा हेतु 1899–1900 में ‘उलगुलान’ (महान विद्रोह) का नेतृत्व किया। अंग्रेजों की भूमि-हड़प नीति का विरोध करते हुए उन्होंने आदिवासियों को उनकी भूमि दिलाने का संकल्प लिया और अनेक संघर्षों के माध्यम से ब्रिटिश शासन को गंभीर चुनौती दी।
अभाविप अवध प्रांत के प्रांत मंत्री पुष्पेंद्र वाजपेई ने कहा कि, “भगवान बिरसा संदेश यात्रा आज उनकी जन्मस्थली उलिहातु से प्रारंभ होकर विभिन्न राज्यों से होती हुई अभाविप के देहरादून राष्ट्रीय अधिवेशन स्थल पहुंचेगी, जहां इसका समापन होगा। यह संदेश यात्रा भारत के ‘स्व-बोध’ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से भगवान बिरसा द्वारा दी गई सीख को जनसामान्य तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।”



