
छात्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान और पारदर्शिता के लिए कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने दिए कड़े निर्देश –
लखनऊ विश्वविद्यालय: लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के कल्याण, उनके शैक्षणिक माहौल तथा कैंपस जीवन को अधिक सुगम व बेहतर बनाने के उद्देश्य से आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी की अध्यक्षता में आयोजित इसबैठक में छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) और छात्र हितों से जुड़े विभिन्न गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। आगामी सत्र को पूरी तरह छात्र-अनुकूल व बाधारहित बनाने के लिए कुलपति ने छात्र हितों को सर्वोपरि रखते हुए कई बड़े, नीतिगत और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए।
इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिनमें अधिष्ठाता छात्र कल्याण (DSW) प्रो. अमिता कनौजिया,निदेशक प्रवेश प्रो. पंकज माथुर, समन्वयक प्रवेश प्रो.अनित्य गौरव और चीफ प्रोवोस्ट प्रो. आशीष अवस्थी शामिल थे।
बैठक में लिए गए मुख्य निर्णय और नीतिगत दिशा-निर्देश –
1. प्रवेश के साथ ही स्कॉलरशिप फॉर्म और संपूर्ण जानकारी –
छात्रों की सहूलियत के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए यह तय किया गया है कि जैसे ही कोई छात्र विश्वविद्यालय में प्रवेश (एडमिशन) लेगा, उसी वक्त उससे छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) का फॉर्म भी भरवा लिया जाएगा। इस नई व्यवस्था से सत्र के मध्य या अंत में छात्रों को फॉर्म भरने और दफ्तरों के चक्कर काटने की समस्या से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। इसके साथ ही,प्रवेश के पहले ही दिन छात्र को शासन और विश्वविद्यालय स्तर पर दी जाने वाली सभी प्रकार की छात्रवृत्तियों की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की जाएगी।
2. ‘पर्सनल टच’ और सुदृढ़ मेंटरशिप कार्यक्रम –
विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय का व्यक्तिगत जुड़ाव (पर्सनल टच) बढ़ाने के लिए कैंपस में मेंटरशिप कार्यक्रम को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। कुलपति ने निर्देश दिया कि छात्र जिस दिन एडमिशन पूरा करेगा,उसी दिन उसे उसका ‘मेंटर’ (शिक्षक मार्गदर्शक) आवंटित कर दिया जाएगा। यह मेंटर छात्र के पूरे शैक्षणिक सफर में उसकी समस्याओं,करियर काउंसिलिंग और व्यक्तिगत संशय को दूर करने में एक अभिभावक की भूमिका निभाएगा।
3. स्कॉलरशिप फॉर्म का विकेंद्रीकरण (द्वितीय परिसर के छात्रों को बड़ी राहत): –
प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए स्कॉलरशिप के समस्त फॉर्म अब विकेंद्रीकृत व्यवस्था के अंतर्गत स्वीकार करने की योजना तैयार की गई है। इस व्यवस्था के तहत छात्र अपने फॉर्म अपनी ही फैकल्टी (संकाय) में जमा कर सकेंगे। यदि समाज कल्याण विभाग से इसकी अंतिम अनुमति मिल जाती है,तो इसका सबसे बड़ा लाभ द्वितीय परिसर (Second Campus) के छात्र-छात्राओं को होगा,जिन्हें अब तक फॉर्म वेरिफाई कराने के लिए मुख्य परिसर की दौड़ लगानी पड़ती थी। इस प्रक्रिया के लिए कुलपति ने अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.अमिता कनौजिया को अधिकृत किया है कि वे तत्काल समाज कल्याण अधिकारी से वार्ता करें।
प्रशासनिक शुचिता और पारदर्शिता पर जोर –
बैठक के समापन पर कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने दृढ़ता से स्पष्ट किया कि इन सभी नीतिगत बदलावों और कड़े निर्देशों का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय के भीतर प्रशासनिक शुचिता को सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के प्रति पूरी तरह जवाबदेह है और हमारी प्राथमिकता छात्र-छात्राओं को एक पूरी तरह से पारदर्शी, बाधारहित, सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल प्रदान करना है।



