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भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: सवालों के घेरे में पुलिस, जनाक्रोश के बाद सरकार ने बैठाई न्यायिक जांच –

 

बिहार:- आरा/पटना। भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत अब केवल एक एनकाउंटर नहीं, बल्कि पूरे बिहार में चर्चा और विवाद का विषय बन गई है। परिजनों का आरोप है कि भरत ने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने गोली चलाई। वहीं पुलिस का दावा है कि कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई। इस विरोधाभास ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना के बाद ग्रामीणों और समर्थकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। विरोध प्रदर्शनों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच बिहार सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है।

भरत तिवारी को स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं और विस्थापितों के मुद्दों को उठाने वाले युवा के रूप में भी देखा जाता था। समर्थकों का कहना है कि वह प्रशासन से सवाल पूछ रहा था, जबकि पुलिस उसे कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बता रही है। 

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पूर्व डीजीपी समेत कई वरिष्ठ लोगों ने भी एनकाउंटर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। अब सबकी नजर न्यायिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि यह पुलिस कार्रवाई थी या फिर किसी बड़ी चूक की कहानी।

एनकाउंटर क्या था –

17 जून 2026 को भोजपुर में पुलिस और भरत तिवारी के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस का दावा है कि उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके जवाब में कार्रवाई हुई।

गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनका इलाज पटना में हुआ, जहां बाद में उनकी मृत्यु हो गई।

विवाद क्यों हुआ?

परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई। 

इस घटना के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और निष्पक्ष जांच की मांग उठी।

कई पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं ने भी एनकाउंटर पर सवाल उठाए।

सरकार और जांच :- 

बिहार सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।

मामले में तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की भी खबर सामने आई।

बाद में भरत तिवारी के पिता और भाई पर भी अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें हथियार छिपाने और संरक्षण देने जैसे आरोप लगाए गए।

मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक भी पहुंच चुका है। 

वर्तमान स्थिति :- 

मामला अभी जांच के अधीन है। इसलिए भरत भूषण तिवारी के बारे में पुलिस और परिवार/समर्थकों के दावों में बड़ा अंतर है। न्यायिक जांच और अन्य आधिकारिक रिपोर्टों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मुठभेड़ पूरी तरह वैध थी या नहीं

 

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