
लखनऊ:- लखनऊ विश्वविद्यालय के आगामी 69वें दीक्षान्त समारोह के भव्य और सुचारू आयोजन को लेकर प्रशासनिक भवन के ‘मंथन कक्ष’ में कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी की अध्यक्षता में एक अत्यंत आवश्यक और महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दीक्षान्त समारोह के सफल संचालन हेतु गठित सभी समितियों के अध्यक्षों एवं संयोजकों ने प्रतिभाग किया। बैठक में आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई कि लखनऊ विश्वविद्यालय का आगामी दीक्षान्त समारोह 31 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।
दीक्षान्त के लिए नया ग्रीष्मकालीन भारतीय परिधान निर्धारित –
बैठक का सबसे प्रमुख निर्णय दीक्षान्त समारोह और शोभा यात्रा (Procession) के परिधान को लेकर रहा। कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी की अध्यक्षता में दीक्षान्त के ड्रेस कोड पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद ग्रीष्मकालीन परिधान में आवश्यक संशोधन करते हुए इसे अंतिम रूप दिया गया:
* पुरुषों के लिए: सफेद रंग का भारतीय कुर्ता-पायजामा और उसके साथ महरून रंग की हाफ जैकेट निर्धारित की गई है।
* महिलाओं के लिए: क्रीम रंग की गरिमापूर्ण साड़ी और उसके ऊपर पहनने के लिए महरून रंग की हाफ जैकेट तय की गई है।
कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी का वक्तव्य और निर्देश –
बैठक में सभी व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा करते हुए कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने कहा, “पूर्व निर्धारित परिधान मुख्य रूप से जाड़ों (सर्दियों) के अनुकूल तैयार किया गया था, क्योंकि पूर्व में दीक्षान्त समारोह सर्दियों के मौसम में ही आयोजित होते थे। वर्तमान में, भीषण गर्मी और ग्रीष्म ऋतु के प्रभाव को देखते हुए हमारे शिक्षकों और अतिथियों की सुविधा और स्वास्थ्य सर्वोपरि है। इसी को ध्यान में रखते हुए एक आरामदायक, ऋतु-अनुकूल और भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले नए ड्रेस कोड की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया है।”
कुलपति ने बैठक में उपस्थित सभी समितियों के संयोजकों और अध्यक्षों से उनके विभागों को सौंपे गए निर्धारित कार्यों की वर्तमान प्रगति (Progress) के बारे में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि दीक्षान्त समारोह विश्वविद्यालय का सबसे सर्वोच्च और गरिमापूर्ण उत्सव है, इसलिए सभी समितियां अपनी पूरी टीम और सदस्यों के साथ आपसी समन्वय स्थापित करें। कुलपति ने निर्देश दिया कि तय समय-सीमा के भीतर सभी आवश्यक तैयारियाँ पूरी करना सुनिश्चित किया जाए ताकि 31 जुलाई को आयोजित होने वाले इस दीक्षान्त समारोह को ऐतिहासिक और भव्य बनाया जा सके।



