
नशे के अड्डे पर काबू नहीं कर सकते, नशे की दुकान पर लगाम नहीं कस सकते, पर जो अहंकार को आहत पहुँचाए, उसे वर्दी का रुआब जरूर दिखाना आता है कुछ पुलिसकर्मियों को.
पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के पश्चिमी जोन की कानून व्यवस्था के बिगड़े हालात पर पुलिस नाकाम है लगाम कसने में, पर जो उनके रुआब और अहंकार को ठेस पहुंचाए वह जरूर आरोपी है.
लखनऊ :- राजधानी लखनऊ में थाना ठाकुरगंज के बालागंज चौकी क्षेत्र स्थित जस्ट मदिरा मॉडल शॉप की दुकान के बाहर व आसपास रोजाना नशेबाजी का माहौल बना रहता है। लोग खुलेआम शराब का सेवन करते हैं और इस कदर शराब का सेवन करते हैं कि आने जाने वाले परिवार के लोगों और राजगीरों को शर्म आ जाए, पर ना आबकारी को आती है शर्म और ना बालागंज पुलिस को…
पुलिस और आबकारी दोनों ही नशे के इस अड्डे पर हस्तक्षेप नहीं करते, नशे के अड्डे को खत्म नहीं कर सकते, आखिरकर दोनों अंग्रेजी और देशी शराब की दुकान के फायदे की बात है, पर सिर्फ नशा का सेवन करने वालों पर कार्यवाही कर अपनी जिम्मेदारी दिखाने आते हैं, कुछ तो फायदा छुपा होगा और फायदे की उम्मीद होगी…?
पर बेहद ताजुब की बात है कि एक व्यक्ति द्वारा शौच करते वक्त जब पुलिस ने उसे और उसके साथ खड़े व्यक्तियों को वहां से भगाने और उसके बाद अपने साथ ले जाने के लिए धक्का मुक्की और जबरदस्ती करना चाहा, तो वह व्यक्ति भागने के बजाए पुलिसकर्मियों के सामने डट के खड़ा हो गए। यह गलती थी उन व्यक्तियों की, पर असली कसूरवार वहां नशा और नशे का अड्डा है, जिसे पुलिस अपने फायदे के लिए खत्म करना नहीं चाहती…
अहंकार पर आहत पहुंचाने पर दोनों पुलिस कर्मियों ने, और फोर्स बालागंज चौकी से बुलवाई और एक के शौच करने पर तीन से चार लोगों को अपने साथ चौकी ले गए। जहां चौकी के अंदर उन युवकों की बेहद बेरहमी से पिटाई करते हुए उन युवकों को अपनी वर्दी का रूआब दिखा ही दिया, वाह क्या जिम्मेदारी निभाई है…
*पर क्या वहां उस व्यक्ति की गलती थी या पूरे नशे के अड्डे की, आजतक नशे के अड्डे का वर्चस्व कायम, पीने वालों पर कार्यवाही कर जिम्मेदारी दिखाई जाती है, तो साफतौर पर फायदा भारी है…*
आज तक बेहद शर्म की बात है कि पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के पश्चिमी क्षेत्र में ठाकुरगंज थाने की पुलिस अपनी कार्यशैली से प्रभावित नहीं करती, बल्कि अपने रुआब और दिखावे से प्रभावित करती है। इसी का जीतता जातता उदाहरण गुरुवार की रात बालागंज चौकी क्षेत्र स्थित जस्ट मदिरा मॉडल शॉप की दुकान के बाहर देखने को मिला, भले अब पुलिस कुछ भी धारा डाल कर अपना बचाव करे, पर सच्चाई तो यह है बालागंज चौकी के पुलिस का एक सिद्धांत दिखाई दिया, गंदगी को साफ नहीं करना है, बस गंदगी में खड़े होने वालों को अपनी वर्दी का रूआब दिखाना है और शायद कुछ फायदे की उम्मीद उनसे भी हो…
पुलिस के मुताबिक युवक शौच कर रहे थे और पुलिस वाले पर हमला करने की कोशिश की। पर वहां मौजूद लोगों के मुताबिक जब अपाचे से दो पुलिसकर्मी वहां पहुंचे तो युवक शौच तो कर रहा था और बाकी वहां जमावड़ा बनाकर सिर्फ खड़े थे, जिसे देखते हुए दोनों पुलिस कर्मियों ने उन व्यक्तियों को जबरदस्ती वहां से धक्का मारते हुए पहले तो सड़क ओर ढकेलने की कोशिश की, पर इसी दौरान एक युवक डट के खड़ा हो गया, दूसरा सामना करने के लिए बहस बाजी करने लगा, पर सच्चाई तो यह थीy कि वहां वर्दी का रुआब और अहंकार भी था, जिसके सामने एक आम इंसान अगर सच भी बोलना रहा होगा, तो वह भी झूठ है, यदि इंसान पुलिस के सामने डट के खड़ा हो गया तो वह गलत है और अगर उसने उंगली दिखा दी तो वहां अपराधी है…
इसी बीच दोनों पुलिस कर्मियों के अहंकार को युवक द्वारा ठेस पहुंचाना, भारी पड़ गया। और पुलिस फोर्स बुलाई गई, बात हद से ज्यादा आगे बढ़ने लग गई, तो पुलिसकर्मी ने एक युवक को शर्ट को पकड़ कर, घसीट कर ले जाने लगा। उन लोगा को वहाँ से चौकी ले जाने लगे, इसी बीच डंडे का इस्तेमाल और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ लप्पाझप्पी भी हुई। जिस पर बाकी लोगों ने आपत्ति भी की और आपत्ति का नतीजा यह निकला कि उन युवकों और जो समर्थन कर रहे थे उन्हें चौकी लाया गया, जहां दरवाजे और खिड़की बंद कर बेहद बेरहमी से पिटाई की गई। अपनी वर्दी का रुआब और अपना अहंकार ठंडा किया गया, पर सवाल उठता है कि स्थानीय पुलिस नशे के अड्डे पर लगाम कसने और उसे खत्म करना अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं समझते, सिर्फ शराब पीने वालों और साथ खड़े होने वालों के खिलाफ कार्यवाही करना, क्या अपनी जिम्मेदारी समझती है…?,गंदगी को जड़ से खत्म करना क्या उनकी प्राथमिकता बनती है…?
फिलहाल दे रात बालागंज चौकी की पुलिस ने उन युवकों को चौकी के अंदर बेहद बेरहमी से पीटा और अपने अहंकार को शांत करने के लिए न जाने कौन-कौन सी धारा थोप दी गई होगी और कार्यवाही की गई होगी….?



