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विकसित उत्तर प्रदेश फ़ॉर विकसित भारत @2047’ सम्मेलन में UPMRC ने 1,575 किमी मेट्रो विस्तार का विजन प्रस्तुत किया –

 

स्वच्छ हवा, सुगम यात्रा: मेट्रो विस्तार से बदलेगी उत्तर प्रदेश की शहरी यात्रा

यूपीएमआरसी ने उच्चतम परिचालन दक्षता और लाभप्रदता के साथ राष्ट्रीय मानक स्थापित किया 

विजन 2047: आधुनिक, सतत और एकीकृत शहरी परिवहन की दिशा में बड़ा कदम, केवल लखनऊ शहर में 225 किमी का मेट्रो नेटवर्क प्रस्तावित –

✍️रवि शर्मा

 

लखनऊ:-   उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने “विकसित उत्तर प्रदेश फ़ॉर विकसित भारत @2047” कार्यशाला में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश सरकार के शहरी विकास विभाग तथा नगर एवं ग्राम नियोजन एवं आवास विभाग द्वारा गोमती नगर, लखनऊ स्थित निदेशालय नगरीय निकाय में आयोजित किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए शहरी विकास का एक बेहतर और दूरदर्शी रोडमैप तैयार करना था।

UPMRC के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने विशिष्ट वक्ता के रूप में अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश के लिए आधुनिक, सुरक्षित, हरित और सुविधाजनक शहरी परिवहन का विजन साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में UPMRC लखनऊ, कानपुर और आगरा में मेट्रो चलाता है और भविष्य की योजना के तहत लखनऊ में 225 किमी, कानपुर में 200 किमी और आगरा में 100 किमी तक मेट्रो नेटवर्क का विस्तार प्रस्तावित है।

 कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश में मेट्रो परियोजनाएं गृह ऋण जैसी वित्तीय संरचना पर आधारित हैं, जिसमें आधी लागत भारत सरकार और राज्य सरकार मिलकर इक्विटी के रूप में देती हैं और बाकी 50% राशि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से ऋण के रूप में मिलती है। लखनऊ, कानपुर और आगरा में प्रस्तावित मेट्रो विस्तार के लिए प्रति वर्ष लगभग ₹1,040 करोड़ की आवश्यकता होगी, और एक परियोजना को पूरा होने में लगभग पांच वर्ष लगते हैं।

उन्होंने बताया कि नोएडा–ग्रेटर नोएडा, वाराणसी और प्रयागराज में 150–150 किमी के मेट्रो कॉरिडोर की योजना बनाई गई है। वहीं गोरखपुर, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, झांसी, अयोध्या, मथुरा–वृंदावन, अलीगढ़ और सहारनपुर में 50–50 किमी के मेट्रो नेटवर्क का प्रस्ताव है। कुल 1,575 किमी के इस विशाल नेटवर्क में से लगभग 790 किमी लक्ष्य के अनुसार 2035 तक पूरा किया जाएगा। इन परियोजनाओं के लिए अलग–अलग शहरों में कुल लगभग ₹1,527 करोड़ वार्षिक निवेश की जरूरत होगी।

उन्होंने यह भी बताया कि UPMRC के सभी मेट्रो सिस्टम वर्तमान में लाभ में हैं। प्रति किमी अधिकतम राजस्व और न्यूनतम खर्च के साथ UPMRC ने टियर–2 शहरों में संचालन दक्षता का राष्ट्रीय स्तर पर मानक स्थापित किया है।

 कुमार ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश अब छह शहरों में मेट्रो सेवाओं के साथ देश का अग्रणी राज्य बन चुका है, जिससे भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है और जल्द ही अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दूसरा सबसे बड़ा बनने जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने बड़े पैमाने पर ट्रांजिट–ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) लागू किया है, जिससे गैर–किराया राजस्व लगातार बढ़ रहा है। लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर करने के लिए Uber और Rapido के साथ समझौते किए गए हैं, और सभी स्टेशनों पर पार्किंग सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

अंत में कुमार ने कहा कि यह व्यापक मेट्रो विस्तार न केवल यात्रा क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि जीवन की गुणवत्ता में सुधार करेगा और उत्तर प्रदेश को सुरक्षित, स्वच्छ, टिकाऊ और भविष्य तैयार शहरी परिवहन के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगा।

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