लखनऊपूर्वांचल
Trending

नगर निगम जोन 4 और पार्षद शैलेंद्र वर्मा के सराहनीय कार्य से विभूति खंड क्षेत्र में गंदगी ढूंढने की जरूरत नहीं —

आखिर दिखावा और कमाई करने वाले पार्षद और कागज़ों पर ध्यान देकर धन उगाही करने वाली नगर निगम जोन 4, पर कब सरकार और प्रशासन शिकंजा कसकर विकास कराएगा...?

 

 

लखनऊ :-  राजधानी लखनऊ में नगर निगम जोन 4 के क्षेत्र की दशा यह है कि स्मार्ट सिटी लखनऊ कहते हुए भी शर्म आती है…
विभूति खंड क्षेत्र की स्थिति कुछ ऐसी है कि हर गली में गंदगी है, पर पता नहीं क्यों पार्षद शैलेंद्र वर्मा को दिखाई नहीं देती, नगर निगम जोन 4 के सफाई अधिकारियों और कर्मचारियों को दिखाई देती नहीं…
लेकिन शासन द्वारा अच्छा खासा बजट सफाई, इंटरलॉकिंग, मेंटेनेंस, पार्कों आदि पर खर्च होता है। आखिर कहां जाता है सरकारी पैसा…?
अभी हाल ही में महापौर सुषमा खर्कवाल के मुताबिक पार्षद शैलेंद्र वर्मा के वार्ड को 2 साल में करीब 112 करोड रुपए दिए गए, पर क्षेत्र की स्थिति देखकर यही मुंह से निकलेगा कहां गए 112 करोड़ रुपए…?
विकास का अता पता नहीं, गंदगी से गलियां हरि भरी, सड़क पर गड्ढों की कमी नहीं, नालियां मानो कीचड़ और गंदगी का डंपिंग हिस्सा, सीवर सड़क से भी ऊपर, मानो बाढ़ के लिए बनाए गए हों…
हैरत की बात तो तब होती है जब बरसात होती है। सड़कों पर नाली दिखती नहीं और सीवर तैरता हुआ दिखता है, पर दिखता है तो सिर्फ बारिश का पानी। ऐसे में राहगीरों के लिए मुश्किल तो होती ही है, पर सबसे शर्मनाक बात तो तब होती है जब बारिश के पानी में नाली की गंदगी, सीवर का गंदगी और कचरा, सब मिल जाती है। बारिश का पानी को साफ तो नहीं कहा जा सकता है, पर हां पार्षद शैलेंद्र वर्मा और नगर निगम जोन 4 के द्वारा धन उगाही वाले कार्य की वजह से बीमारी जरूर दस्तक दे देती है…
बारिश हो या सुखा, विभूति खंड क्षेत्र में गंदगी आपको हर जगह दिखाई देगी, ढूंढने की जरूरत नहीं। सफाई और प्रशंसा पाने के लिए नगर निगम जोन 4 और पार्षद शैलेंद्र वर्मा शिलान्यास और फोटो खिंचवाकर दिखावा जरुर कर लेते हैं…
विकास के नाम पर क्षेत्र के नागरिक ही थूकते हैं ऐसे कार्य को, जिसे शैलेंद्र वर्मा और नगर निगम जोन 4 सराहनीय कार्य कहते हैं। फिलहाल माहौल है धन उगाही का, भ्रष्टाचार का और किसके हिस्से में कितना जा रहा है इस बात का…
क्षेत्र में कार्य कौन करना चाहता है…?, पद की गरिमा कौन रखना चाहता है…?, चाहता है तो बस पैसा कमाना, इसलिए पार्षद शैलेंद्र वर्मा सफारी से फॉर्च्यूनर और दिखावा के साथ कमाई पर यकीन रखते हैं, वहीं नगर निगम जोन 4 के अधिकारी से लेकर कर्मचारी धन उगाही के लिए कागज़ों पर ध्यान देते हैं…
क्षेत्र की दुर्दशा महा बेकार, तो सवाल उठता है आखिर कहां गए 112 करोड़ रुपए…? 

ये मामला नगर निगम ज़ोन 4 का है जहां पार्षद और नगर निगम की मिलीभगत से 112 करोड़ विकास के नाम पर दिए गए वो कहा गए, सोचिए राजधानी के हर हिस्सों में स्मार्ट सिटी के नाम पर कितना बजट पास हुआ होगा ,यदि लोगों से उनकी राय और समस्या सुनी जाए तो शायद नगर निगम पर जांच बैठ जाए। न जाने विकास के नाम पर और स्मार्ट सिटी को कागजों में दिखाने के नाम पर ना जाने कितने कार्य खोंखले दावों के बीच में दबा दिए गए होंगे ? 

मो – 8707321382 

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button

You cannot copy content of this page