औरंगजेब के अत्याचारों की कहानी बताता बनारस का 627 साल पुराना राम मंदिर –

✍️नवीन तिवारी
वाराणसी:- रामनवमी-2025 पर जानिए काशी के इस अति प्राचीन मंदिर के संघर्ष की कहानी. नए रूप में कैसा दिखेगा ये बनारस का राम मंदिर. वर्तमान स्थिति में बनारस का राम मंदिर. वाराणसी: काशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है. काशी विश्वनाथ और उसके आसपास मौजूद मंदिरों के बड़े मंडप के साथ ही बहुत से ऐसे मंदिर हैं, जो सन 1600 में मुगलकालीन शासक औरंगजेब के फरमान के बाद तोड़े गए थे. विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी को लेकर वाद न्यायालय में चल रहा है.
कई और मंदिरों का विवाद भी काशी के ही न्यायालय में चल रहा है. जहां मंदिरों की जगह अब मस्जिदों के निर्माण की बात कही जाती है. ऐसे में काशी का एक 627 वर्ष पुराना राम मंदिर अपने आप में उस इतिहास को समेटे हुए हैं, जो मुगलकालीन शासको की बर्बरता का शिकार हुए. बनारस के राम मंदिर पर खास रिपोर्ट. वाराणसी के कश्मीरी गंज मोहल्ले में मौजूद श्रीराम जानकी मंदिर 1398 ईस्वी में बना, लेकिन 1673 ईस्वी में औरंगजेब ने इस मंदिर को काफी नुकसान पहुंचाया, फिर भी यह मंदिर आज भी सीना ताने खड़ा है और अब नए रूप में सामने आने वाला है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां शिला पूजन करके मंदिर के नवनिर्माण के रूपरेखा तैयार कर दी है. यह मंदिर हर मामले में खास है. क्रांतिकारियों ने भी इस मंदिर में छिपकर अपना समय व्यतीत किया और अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका था. काशी में प्रभु राम के भव्य मंदिर का निर्माण होने जा रहा है, जो आठ हजार स्क्वायर फीट में बनकर तैयार होगा. मंदिर 3 तल का होगा, जिसमें राम दरबार, राधाकृष्ण, भगवान शंकर, मां दुर्गा और हनुमान जी की मूर्तियां होंगी. बनारस के राम मंदिर का प्रस्तावित नया रूप. इसके साथ ही रामानंदाचार्य, अनंतानंदाचार्य और गोस्वामी तुलसीदास की भी प्रतिमा स्थापित की जाएगी. पहले तल पर संत-महंत निवास, दूसरे तल पर अतिथि निवास, तीसरे तल पर छात्रावास और चौथे तल पर कक्षाओं का संचालन व भोजनशाला का इंतजाम रहेगा. इसके साथ ही प्रकल्प सेवा में संत सेवा, गो सेवा, वेद और शास्त्रों के छात्रों के अध्ययन के लिए निशुल्क इंतजाम किए जाएंगे. मंदिर में शोध प्रकल्प का संचालन भी होगा. इसमें यज्ञ, वेद और भारतीय शास्त्रों पर अध्ययन व शोध होगा. सबसे बड़ी बात यह है कि मंदिर का निर्माण रामानंदाचार्य के प्रथम शिष्य अनंताचार्य के द्वारा किया गया था. वर्तमान में इस पीठ की 23वीं पीढ़ी के रूप में जगदगुरु स्वामी रामकमलाचार्य वेदांती महाराज गद्दी संभाल रहे हैं. राम मंदिर इतना खास क्यों है? इस बारे में काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि काशी के भेलूपुर कश्मीरीगंज क्षेत्र स्थित श्रीराम का निर्माण 1398 में हुआ था. इस मंदिर को 1673 में औरंगजेब ने ध्वस्त करा दिया था और पुनः सन 1700 ई. में सियाराम दास ने इसे बनवाया था. बनारस के राम मंदिर में स्थापित राम दरबार. प्रोफेसर द्विवेदी ने बताया कि यह मंदिर अपने आप में बेहद खास है, क्योंकि इस मंदिर में एक तरफ यहां मुगलकालीन शासकों के अत्याचार की कहानी बयां होती है. क्रांतिकारियों ने भी इस मंदिर का इस्तेमाल अंग्रेजों से बचने के लिए किया. चंद्रशेखर आजाद जब अंग्रेजों से बचते हुए देश भर में भ्रमण कर रहे थे, तब इस स्थान पर उन्होंने एक सप्ताह से ज्यादा का वक्त बिताया था. मंदिर परिसर बड़ा है और कमरों के अंदर कमरे और आंगन के अंदर आंगन है, जिसमें छिपना और वहां से भागना भी बेहद आसान था. इस वजह से चंद्रशेखर आजाद यहीं छुपकर रहा करते थे. सुभाष चंद्र बोस भी जब काशी पहुंचे तो वह 15 दिन तक साइकिल से इसी मंदिर में आकर रहते थे और यही विश्राम किया करते थे. इस मंदिर के नव निर्माण को लेकर आर्किटेक्ट संदीप त्रिपाठी इस पर काम कर रहे हैं. इसका स्ट्रक्चर और डिजाइन बनाकर तैयार किया है. संदीप ने बताया कि यह मंदिर बिल्कुल राम मंदिर की तर्ज पर तैयार किए जाने की प्लानिंग हुई है. राजस्थान के गुलाबी पत्थरों से मंदिर का निर्माण किया जाना है. मंदिर आर्किटेक्ट के आधार पर एक शिखर और तीन मंडप जैसा श्री राम जन्मभूमि पर भगवान राम के मंदिर में हो वैसा ही यहां पर भी बनाया जाएगा. इसके अलावा अन्य बहुत सी सुविधाएं और गुरुकुल परंपरा को जीवित रखने के लिए गुरुकुल का निर्माण भी यहां पर होगा. सम्पूर्ण मंदिर 2027 तक बन जाएगा.