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लखनऊ में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़, विदेशी नागरिकों से साइबर ठगी करने वाला गिरोह बेनकाब –

ऑपरेशन CY-VAJRA के तहत विभूतिखंड पुलिस और पूर्वी जोन की क्राइम टीम की बड़ी कार्रवाई, मास्टरमाइंड समेत 4 गिरफ्तार, 31 लैपटॉप, 14 मोबाइल और ₹18.50 लाख नकद बरामद --

अमित चंद्रा  — 

 

लखनऊ:-  पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने साइबर अपराध के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन CY-VAJRA के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए विभूतिखंड थाना क्षेत्र में संचालित एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में विदेशी नागरिकों, विशेषकर अमेरिका के लोगों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड समेत चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार, यह फर्जी कॉल सेंटर विभूतिखंड स्थित साइबर हाइट बिल्डिंग के चौथे तल पर फ्लैट संख्या 420A में संचालित किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान मौके से 31 लैपटॉप, 14 मोबाइल फोन, 32 कंप्यूटर माउस, दो राउटर, अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा 18.50 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। नकदी आरोपी सूरज त्रिपाठी की कार से बरामद हुई।

 

ऐसे दिया जाता था साइबर ठगी को अंजाम –

जांच में सामने आया कि गिरोह ने “Apple Customer Support” के नाम से फर्जी वेबसाइट तैयार कर उसे गूगल विज्ञापनों के माध्यम से प्रमोट किया था। वेबसाइट पर प्रदर्शित कस्टमर सपोर्ट नंबर पर जब विदेशी नागरिक कॉल करते थे तो उनकी कॉल VOIP सिस्टम के जरिए लखनऊ स्थित कॉल सेंटर पहुंचती थी।

यहां मौजूद एजेंट पहले पीड़ित की जानकारी लेते थे, जिसके बाद कॉल को “क्लोजर” के पास ट्रांसफर कर दिया जाता था। क्लोजर स्वयं को कभी अमेरिकी Federal Trade Commission (FTC) का अधिकारी, कभी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी तो कभी अन्य सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर पीड़ितों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते थे। इसके बाद उनसे गिफ्ट कार्ड, नकदी या अन्य माध्यमों से धन उगाही की जाती थी।

हवाला के जरिए पहुंचता था पैसा –

पुलिस के मुताबिक, अमेरिका में मौजूद गिरोह के सदस्य ठगी की रकम गिफ्ट कार्ड, सोना अथवा नकदी के रूप में एकत्र करते थे, जिसे बाद में हवाला नेटवर्क के जरिए लखनऊ में संचालित गिरोह तक पहुंचाया जाता था। संदेह से बचने के लिए गिरोह समय-समय पर अपनी स्क्रिप्ट और कार्यप्रणाली भी बदलता रहता था।

मास्टरमाइंड समेत चार गिरफ्तार –

गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का सरगना सूरज त्रिपाठी निवासी प्रतापगढ़, उसके रिश्तेदार विवेक पाण्डेय और राहुल त्रिपाठी, तथा मुंबई निवासी तकनीकी विशेषज्ञ आकाश अरुण दत्ता उर्फ रिक्की शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, सूरज त्रिपाठी ने वर्ष 2012-13 में अहमदाबाद में कॉल सेंटर में काम करने के दौरान इस प्रकार की गतिविधियों की जानकारी हासिल की थी, जिसके बाद उसने संगठित साइबर ठगी का नेटवर्क खड़ा किया।

35 एजेंट मौके पर मिले –

छापेमारी के दौरान कॉल सेंटर में 35 कॉलिंग एजेंट काम करते मिले। इनमें उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड, असम, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत नेपाल के युवक-युवतियां भी शामिल थे। पुलिस सभी एजेंटों से पूछताछ कर गिरोह के नेटवर्क और अन्य सदस्यों की जानकारी जुटा रही है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा –

आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ आईटी एक्ट की धारा 66C, 66D तथा टेलीकम्युनिकेशन एक्ट की धारा 42 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस का कहना है कि बरामद डिजिटल उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। साथ ही गिरोह के देश-विदेश में फैले नेटवर्क, हवाला कनेक्शन और अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है।

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