(वीसी) के “आदेशों” का पालन नहीं, बिल्डरों से कर रखी है “सांठगांठ”;चौक की सकरी गली में “युद्ध स्तर” पर जारी है (व्यावसायिक) बिल्डिंग का निर्माण –

लखनऊ:- एल.डी.ए (वीसी) जहां एक और अवैध निर्माणों पर शिकंजा कसने के जबरदस्त मुहिम चलावा रहे हैं। वहीं प्रवर्तन विभाग के इंजीनियरों द्वारा अनाधिकृत निर्माणों को संरक्षण देकर ( V. C ) आदेशों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है।
पैसे के लालच में इंजीनियर उपाध्यक्ष के आदेशों का पालन न करते हुए बिल्डरों से सांठगांठ करके अपनी जेबें भरने में जुटे हैं। हालांकि अभी कुछ दिन पहले ही एक दर्जन से अधिक भ्रष्ट इंजीनियरों की सूची कार्रवाई हेतु शासन भेजी जा चुकी है। जिस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है।
बावजूद इसके प्रवर्तन विभाग के कुछ इंजीनियर पैसा कमाने के खेल में जुटे हैं।
उदाहरण के तौर पर (ज़ोन:7) विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे अवैध निर्माणों को देखा जा सकता है। जहां बिना मानचित्र के आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक बिल्डिंगों का निर्माण बड़े ही गुपचुप तरीके से किए जा रहा हैं। हालांकि इस खेल में क्षेत्रीय इंजीनियर सहित सुपरवाइजर अहम भूमिका निभा रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला चौक क्षेत्र का प्रकाश में आया है।
अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधि मंडल द्वारा प्राधिकरण के सचिव से मुलाकात करके एक बड़े अवैध निर्माण पर कार्यवाही करने की मांग की गई है। इसके अलावा अधिवक्ता अजय कुमार द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की गई। यही नहीं शासन और मंडलायुक्त को भी इस अवैध निर्माण की सूचना दी गई है।
हालांकि अभी तक इस पर कोई कार्यवाही की सूचना नहीं मिली है।
माना जा रहा है कि जल्द ही ज़ोनल अधिकारी पुराने लखनऊ का निरीक्षण करने वाले हैं।
शिकायत करताओ ने बताया कि (पुरानी सब्जी मंडी चौक) में सकरी गली में लगभग चार से 5 हज़ार वर्ग फीट भूमि पर युद्ध स्थल पर व्यवसायिक बिल्डिंग का निर्माण चल रहा है।
हैरत की बात क्या है कि दिल्ली कांड के बावजूद उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चौक क्षेत्र में बनने वाली इस अवैध बिल्डिंग में अवैध खनन करके डबल बेसमेंट भी बनाए गए। इसके अलावा नियम एवं मानकों का खुला उल्लंघन करते हुए सेटबैक की भूमि भी नहीं छोड़ी गई है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि किसी अनहोनी होने पर इस सकरी गली में दमकल की गाड़ी भी नहीं पहुंच सकती।
इस सबके बावजूद व्यावसायिक बिल्डिंग का निर्माण खुलेआम जारी है। और अधिकारी अपनी आंखें मूंदे हुए हैं। ज़ोनल अधिकारी को भी शायद इसकी खबर नहीं है। क्योंकि शिकायत आने पर उनको गुमराह कर दिया जाता है।