
श्री काशी विश्वनाथ धार्मिक अनुसंधान संस्थान ट्रस्ट वाराणसी (रजि ०) –
चैत्र माह में पड़ने वाली नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि कहा जाता है. यहां जानिए इस साल चैत्र नवरात्रि कब से शुरू हो रही है और चैत्र नवरात्रि पर किस शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की जा सकती है. हिंदू धर्म में चैत्र मास में पड़ने वाली चैत्र नवरात्रि का भी खास महत्व होता है. यह हिंदू वर्ष की पहली नवरात्रि होती है, जिसके साथ नववर्ष (विक्रम संवत) का भी आगमन होता है. चैत्र नवरात्रि के दौरान भक्तजन पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा भक्ति में लीन रहते हैं. धार्मिक मान्यता अनुसार चैत्र नवरात्रि ऐसा समय होता है जिस दौरान मां दुर्गा पूरे 9 दिनों तक धरती पर वास करती हैं. इसलिए इस दौरान घर-घर माता रानी की पूजा आराधना की जाती है.इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत रविवार 30 मार्च 2025 से हो रही है।
क्योंकि इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ रहे हैं। पंचमी तिथि के क्षय होने के कारण आठ दिनों की नवरात्र होगी। आदिशक्ति मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना भक्त करेंगे। दो अप्रैल दिन बुधवार को चौथी और पंचमी की पूजा होगी। सृष्टि का चक्र चलाने वाली आदिशक्ति मां शेरावाली इस वर्ष हाथी पर सवार होकर आएंगी और हाथी पर ही बैठकर प्रस्थान करेंगी।
नवरात्रि में घटस्थापना 30 मार्च को होगी और रामनवमी 6 अप्रैल को होगी। नवरात्रि का आरंभ इस बार रविवार से होगा।सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है।हर साल में चार बार नवरात्र (Chaitra Navratri 2025) का पर्व मनाया जाता है, जिसमें से दो प्रकट नवरात्र होते हैं, जिन्हें चैत्र और शारदीय नवरात्र के रूप में जाना जाता है। वहीं माघ और आषाढ़ महीने में आने वाले नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। नवरात्र का आठवां और नौवा दिन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इन दोनों ही तिथियों पर कन्या पूजन का विधान है।इस बार चैत्र नवरात्र की महाष्टमी और महानवमी का संयोग देखने को मिल रहा है, क्योंकि इस बार पंचमी तिथि का क्षय हो रहा है। ऐसे में 8 दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। इस प्रकार 5 अप्रैल को चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि का पूजन किया जाएगा और इसी दिन पर कन्या पूजन भी किया जाएगा। इसी के साथ अगले दिन यानी 6 अप्रैल को चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि का पूजन और राम नवमी का पर्व मनाया जाएगा। चैत्र नवरात्रि में सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग का संयोग भी है।
चैत्र नवरात्रि में रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। खास बात यह है कि महापर्व के दौरान चार दिन रवि योग तथा तीन दिन सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग रहेगा। यानी, ये पूरा समय पूजा-पाठ और शुभ कामों के लिए अच्छा है। रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग दोनों ही ज्योतिषाचार्य सतीश शुक्ला का कहना है,इस बार चैत्र नवरात्रि रविवार से शुरू हो रही है, इसलिए मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आएंगी। इससे लोगों के धन में बढ़ोतरी होगी और देश की अर्थव्यवस्था अच्छी होगी। मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी और 7 अप्रैल को हाथी पर सवार होकर ही वापस जाएंगी।
चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त –
उदया तिथि के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 30 मार्च को है यानी कि घट स्थापना इसी दिन होगी। कलश स्थापना के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:13 मिनट से 5:53 मिनट।
दूसरा मुहूर्त सुबह 6 बजकर 35 मिनट से 8 बजकर 12 मिनट तक वृषभ लग्न में
तीसरा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 43 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक है।
प्रतिपदा रहेगी दोपहर 2:14 तक
पंचक 6: 14 पर समाप्त होगा।
इसके अलावा, शाय: 6 बजकर 14 मिनट के बाद से सर्वार्थ सिद्धि योग लग जायेगा, आप इसमें मे घट स्थापना कर सकते है।